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बिटिया के चौथे जन्मदिन पर
फिर क्यों ये बेटियां, अपने ही घर मेहमान कहलाती हैं।
बेटी है तो घर, घर लगता है।
हां, मुझे प्यार जताना नहीं  आता ।
मेरी बेटी जब घर से विदा होगी ।
बेटी मेरा आज और बेटी ही कल है।
मेरी गुमनाम ज़िन्दगी की पहचान है वो ।

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मेरी बेटी

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